इंदौर। मशहूर पंजाबी गायक दिलजीत दोसांझ के 15 नवंबर को इंदौर में होने वाले लाइव कॉन्सर्ट से पहले चार गानों को लेकर प्रशासनिक और कानूनी मामला सामने आया है। महिला एवं बाल विकास विभाग के जिला बाल संरक्षण अधिकारी ने 6 नवंबर को C-21 मॉल प्रबंधन को पत्र जारी कर कार्यक्रम में चार गानों की प्रस्तुति नहीं होने देने के निर्देश दिए हैं। इसके लिए पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट के 22 जुलाई 2019 के फैसले का हवाला दिया गया है। हालांकि इस मामले में एक महत्वपूर्ण कानूनी पहलू यह भी है कि हाईकोर्ट का मूल आदेश पंजाब, हरियाणा और चंडीगढ़ के प्रशासनिक अधिकारियों के लिए जारी हुआ था, जबकि इंदौर मध्यप्रदेश में है।
*हाईकोर्ट ने क्या कहा था?* –पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने 22 जुलाई 2019 को CWP-PIL-27011/2016 सहित पांच याचिकाओं का एक साथ निराकरण करते हुए शराब, नशीले पदार्थों और हिंसा का महिमामंडन करने वाले गानों को लाइव शो में बजाने से रोकने के लिए संबंधित राज्यों के पुलिस महानिदेशकों को निर्देश दिए थे। फैसले में अदालत ने माना था कि इस तरह के गीत कम उम्र के बच्चों पर प्रतिकूल प्रभाव डाल सकते हैं। आदेश में स्पष्ट रूप से कहा गया था कि ऐसे गाने लाइव शो में भी नहीं बजाए जाएं।हालांकि आदेश के संबंधित निर्देश पंजाब, हरियाणा और केंद्रशासित प्रदेश चंडीगढ़ के प्रशासनिक तंत्र को संबोधित थे। ऐसे में मध्यप्रदेश में इस आदेश को लागू करने का आधार और स्थानीय प्रशासन की स्वतंत्र वैधानिक शक्तियां महत्वपूर्ण कानूनी प्रश्न हैं।
*चार गानों को लेकर विभाग का निर्देश* –जिला बाल संरक्षण अधिकारी के 6 नवंबर के पत्र में ‘पटियाला पैग’, ‘5 तारा ठेके’, ‘जेब विच्चों अफीम लभिया’ और ‘जट्ट उथे फायर करदा जित्थे पाबंदी हथियार दी’ को कॉन्सर्ट में प्रस्तुत नहीं करने के लिए कहा गया है। विभाग ने तर्क दिया है कि कार्यक्रम में पांच साल से अधिक उम्र के बच्चों को भी प्रवेश दिया जाएगा। ऐसे में इन विभाग ने हाईकोर्ट के आदेश का हवाला देकर गानों की प्रस्तुति रोकने के निर्देश तो जारी कर दिए हैं, लेकिन मध्यप्रदेश में इस निर्देश का वैधानिक आधार क्या है? क्या यह विभाग की ओर से आयोजकों को जारी प्रशासनिक अनुपालन संबंधी निर्देश है या किसी अन्य राज्यव्यापी कानून अथवा स्थानीय आदेश के तहत कार्रवाई की जा रही है? इस पर विभाग और जिला प्रशासन का आधिकारिक स्पष्टीकरण महत्वपूर्ण होगा।